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राम भजन तुम फ़िक्र न करना

221 1221 12 21 122  रघुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना दुनिया के/ अजब रंगये हमजान न पाते अपने ही/  हमें रोज  यहाँ आँख दिखाते इस शीश/ पे प्रभु हाथ है तुम फ़िक्र न करना र घुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना आते हैं या जाते हैं ये सुख दुख के है बादल प्रभु राम जी के नाम से  संवारो नया कल वो धूप में बरसात है तुम फ़िक्र न करना रघुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना 

ग़ज़ल सहमी सहमी सी ये फ़िज़ा क्या है?

  🌸 क़ाफ़िया -- "आ"   🌸 रदीफ़ -- क्या है वज़्न 2122  1212  22 1. सहमी सहमी सी ये फ़िज़ा क्या है? गुज़रे लम्हे ने की ख़ता क्या है? 2.आज अपना सँवारे हम दोनो। यूँ अकडने में फ़ायदा क्या है? 3.ग़लतियों का हिसाब जोड़ें क्यूँ? छोड़ो इन बातों में रखा क्या है? 4.घर भी ख़ुश हो के चहचहाएगा।  इतनी ख़ामोशी में मज़ा क्या है? 5. ज़िंदगी ख़्वाब सी भले न लगे।   सच को जीने में अब सज़ा क्या है?   शालिनी गर्ग

रुक्मिणी की प्रेम पाती

  रुक्मिणी की प्रेम पाती सार छंद 16 12 विदर्भ राज भीष्मक जी की, रुक्मिणी थी दुलारी, नारद मुनि से कृष्ण कथाएँ, सुनती थीं वो सारी। अद्भुत मनोरम छवि सुंदरम, हृदय में थी उतारी, कामना यही पलपल बढ़ती, उन पर जाऊँ वारी।।1।। बिटिया के वर गिरधर नागर, राजा यही चुने थे, गिरधर ने भी नाम रूप गुण, रुक्मिणी के सुने थे। विधाता भी जीवन के खेल, अजब-गजब दिखलाए, भाई रुक्मी शिशुपाल संग, बहन विवाह रचाए ।।2।। नहीं सहूँगी अनर्थ भैया, कहती राजदुलारी, दुष्ट पाल को नहीं वरूँगी, मृत्यु मुझे है प्यारी। बहते अश्रु देख बिटिया के, राजा जी चिल्लाए, जिद्दी रुक्मी पिता बहन को, नजरबंद करवाए ।।3।। अश्रु सूखे थम गई धडकन, याद आए बिहारी, लिख रही हूँ प्रेम की पाती, ओ मेरे बनवारी। भेज रही हूँ दूत ब्राहमन, दर्द हृदय का लिखकर, देर न करना आना जल्दी, पाती मेरी पढकर ।।4।। हे केशव बिन देखे तुमको, मैने प्रेम किया है, तुमरी लीला के हर रस का, मैने घूट पिया है। पिया बनाया तुमको अपना, बिन पूछे बनवारी, हे माधव इस अबला की है, अब ये लाज तुम्हारी ।।5।। चरणकमल की धूल तुम्हारी,है बस मुझको प्या...

हाँ मैं रील स्क्रोल कर रही हूँ

  हाँ मैं रील स्क्रोल कर रही हूँ निभाया मैने अपना रोल सारा सजाया और सँवारा ये घर तुम्हारा जिम्मेदारी से मुख मोडा नही है जरूरी काम कोई छोडा नही है फुरसत के पलो में मैं क्यूँ अखर रही हूँ  हाँ मैं रील स्क्रोल कर रही हूँ रास आता नहीं तुम्हे मेरा बाहर जाना , अखरता है तुम्हें मेरा सखियों से बतियाना। तुम्हे खलती है ये टी वी की चकचक  बाते अब मेरी तुम्हे लगती हैं बकबक धीरे धीरे अब खुद को बदल रही हूँ हाँ मैं रील स्क्रोल कर रही हूँ तुम्हारे सपने सब मेरे सपने थे , पर मेरे.. सपने कब तुम्हारे अपने थे ? तुम्हारी खातिर भूल रही थी खुद को   बीती गलियों से अब नही गुजर रही हूँ हाँ मैं रील स्क्रोल कर रही हूँ जानती हूँ ये, वेस्ट किया है टाइम पर इतना बड़ा ये, नही है क्राइम न चुगली की है, ना जलन का है कीडा न मन में किसी के तानों की पीडा बस... ' डोपामिन ' का सिप भर रही हूँ

Story 20 The Ten Avatars of God

  Story 20 The Ten Avatars of God Rahul is in his school library. There are many books neatly arranged on the shelves all around him. He is standing in the middle, looking for a nice book to read. Rahul (looking at the books slowly):   Today I want to read a good book… something new and fun…(Suddenly, his eyes fall on a shining book.) On the cover, there are ten forms of Lord Vishnu. The name of the book is: “Dashavatar — The Ten Forms of God.” Rahul (excited):   Wow! These are the same avatars Grandpa told me about—God takes different forms in every age! (Rahul starts turning the pages.) Rahul:   Matsya… Kurma… Varaha… Wow! These are like superhero stories! So interesting! Rahul gets lost in reading the book. Just then… Librarian: Children, library time is over now. Rahul (surprised): Oh no! I haven’t even finished half the book… (After thinking for a moment) Ma’am, can I take this book home? Librarian (smiling): Yes, you can issue this ...

कहानी : 20 भगवान के दशावतार

    कहानी : 20 भगवान के दशावतार राहुल स्कूल की लाइब्रेरी में है ,चारों ओर किताबों की सजी हुई अलमारियाँ  है ,और बीच में खड़ा राहुल , पढ़ने के लिए किताब ढूँढ रहा है । राहुल (धीरे-धीरे किताबें देखते हुए): आज कुछ अच्छी सी किताब पढ़नी है, कुछ नया, कुछ मज़ेदार… ( अचानक उसकी नजर एक चमकती हुई किताब पर पड़ती है) किताब के कवर पर भगवान विष्णु के दस अवतार बने थे— किताब का नाम “ दशावतार — भगवान के दस रूप राहुल (उत्साहित होकर): वाह! ये तो वही अवतार हैं , जिनके बारे में दादाजी बता रहे थे—कि भगवान हर युग में अवतार लेते हैं! राहुल (पन्ने पलटते हुए): मत्स्य… कूर्म… वराह… वाव! ये तो बिल्कुल सुपरहीरो जैसी कहानियाँ हैं! कितनी इंटरेस्टिंग! और राहुल लाइब्रेरी में पढ़ने लगता है तभी… लाइब्रेरियन मैडम: बच्चों  लाइब्रेरी का समय खत्म हो गया है। राहुल (चौंकते हुए): ओह! अभी तो मैंने आधी भी नहीं पढ़ी… ( थोड़ा सोचकर) मैडम , क्या मैं ये किताब घर ले जा सकता हूँ ? लाइब्रेरियन (मुस्कुराते हुए): हाँ बेटा , तुम इसे इश्यू करवा सकते हो। राहुल खुशी-खुशी किताब इश्यू करवाता है ...