221 1221 12 21 122 रघुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना दुनिया के/ अजब रंगये हमजान न पाते अपने ही/ हमें रोज यहाँ आँख दिखाते इस शीश/ पे प्रभु हाथ है तुम फ़िक्र न करना र घुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना आते हैं या जाते हैं ये सुख दुख के है बादल प्रभु राम जी के नाम से संवारो नया कल वो धूप में बरसात है तुम फ़िक्र न करना रघुनाथ जी का साथ है तुम फ़िक्र न करना जन्मों कि ये सौगात है तुम फ़िक्र न करना
Shalini Poetry
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