प्रेम करती हूँ मैं , जानकी की तरह , पर शालिनी हूँ जानकी, ना बन पाऊँगी तुम जो भी कहोगे , करूँगी मैं वो , पर गलत बात को न , मैं सह पाऊँगी प्रेम करती हूँ................. तुम वन को चलो , संग मैं आ जाऊँगी , पर कंदमूल फल ना , रोज खा पाऊँगी प्रेम करती हूँ............. तुम पर विश्वास किया , मैने रामजी की तरह , पर कोई अग्नि परीक्षा , ना मैं दे पाऊँगी। प्रेम करती हूँ......... तुम धोबी की बातों में आ गए जो अगर , अपने घर को यूँ छोड़कर ,ना मैं जा पाऊँगी । प्रेम करती हूँ................ तुमको लव कुश दिए , मैंने जानकी की तरह , पिता का प्यार हमेशा, उन्हें मैं दिलवाऊँगी । प्रेम करती हूँ..............