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कहानी : 20 भगवान के दशावतार

  


कहानी : 20

भगवान के दशावतार

राहुल स्कूल की लाइब्रेरी में है ,चारों ओर किताबों की सजी हुई अलमारियाँ  है ,और बीच में खड़ा राहुल, पढ़ने के लिए किताब ढूँढ रहा है ।

राहुल (धीरे-धीरे किताबें देखते हुए): आज कुछ अच्छी सी किताब पढ़नी है, कुछ नया, कुछ मज़ेदार…(अचानक उसकी नजर एक चमकती हुई किताब पर पड़ती है)

किताब के कवर पर भगवान विष्णु के दस अवतार बने थे— किताब का नाम दशावतार — भगवान के दस रूप

राहुल (उत्साहित होकर): वाह! ये तो वही अवतार हैं, जिनके बारे में दादाजी बता रहे थे—कि भगवान हर युग में अवतार लेते हैं!

राहुल (पन्ने पलटते हुए): मत्स्य… कूर्म… वराह… वाव! ये तो बिल्कुल सुपरहीरो जैसी कहानियाँ हैं! कितनी इंटरेस्टिंग!

और राहुल लाइब्रेरी में पढ़ने लगता है तभी…

लाइब्रेरियन मैडम: बच्चों  लाइब्रेरी का समय खत्म हो गया है।

राहुल (चौंकते हुए): ओह! अभी तो मैंने आधी भी नहीं पढ़ी…

(थोड़ा सोचकर) मैडम, क्या मैं ये किताब घर ले जा सकता हूँ?

लाइब्रेरियन (मुस्कुराते हुए): हाँ बेटा, तुम इसे इश्यू करवा सकते हो।

राहुल खुशी-खुशी किताब इश्यू करवाता है और उसे अपने बैग में संभालकर रखता है ।

 

घर पहुँचते ही राहुल सबसे पहले अपना बैग खोलता है… किताब निकालता है… और सीधा दादाजी के पास पहुँच जाता है।

(दादाजी आराम से बैठकर अख़बार पढ़ रहे हैं)

राहुल (उत्साह से): दादाजी! देखिए —“दशावतार — भगवान के दस रूप”! आपने कल दशावतार बताए थे ना, इस किताब में ये सारे हैं -मैं ये किताब लाया हूँ।

दादाजी (अख़बार से नजर उठाते हुए): बहुत सुंदर किताब है (अख़बार मोड़ते हुए) कहाँ से मिली तुझे ये किताब? बढ़िया… अब तो तुम भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में आसानी से जान लोगे।

राहुल (आँखों में चमक के साथ): स्कूल की लाइब्रेरी से दादाजी, तो फिर आज हम एक-एक करके हर अवतार की कहानी पढ़ेंगे!

दादाजी (स्नेह से): ज़रूर राहुल हर अवतार के पीछे जीवन की एक गहरी सीख और उद्देश्य भी छुपा है।

राहुल (उत्साहित होकर): दादाजी ये भगवान के अवतार? मतलब जैसे सुपरहीरो वैसे ही ना?
दादाजी: सुपरहीरो से भी बढ़कर.... भगवान के ये सुपरहीरो अवतार हमें जीवन की बहुत सी शिक्षा देने आते है ।

राहुल:  पर  दादाजी एक बात समझ नहीं आई — भगवान को बार-बार धरती पर आना ही क्यों पड़ता है?

दादाजी (हल्की मुस्कान के साथ ):बेटा, भगवान कोई आम मनुष्य तो हैं नहीं । वे धरती पर आते हैं, जब सच्चे भक्तों को उनकी सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है

राहुल: मतलब वो अपने भक्तों को बचाने आते हैं?

दादाजी: हाँ भगवान अपना प्रेम प्रकट करने आते हैं जो उनको हमेशा याद करते रहते हैं, भगवान दुष्टो को मारने भी आते हैं।  और भगवान ने गीता के अध्याय 4, श्लोक 7: में कहा है मैं अवतार क्यों लेता हूँ

वैसे तुमने ये श्लोक जरूर सुना होगा ,सुनो —
"
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

राहुल: हाँ हाँ दादाजी मैने सुना है  (धीरे-धीरे दोहराता है):
"यदा यदा… हि धर्मस्य… ग्लानिः… भवति भारत…" पर आगे नहीं आता

दादाजी: चलो मैं पूरा करता हूँ

"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥"

दादाजी : इसका अर्थ ये है बेटा —
"हे भारतवंशी अर्जुन! जब-जब धर्म का पतन मतलब लोस  होता है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ।"

राहुल (आश्चर्य से): ये "प्रकट होना" क्या होता है?

दादाजी: भगवान ने कहा है कि मैं प्रकट होता हूँ मतलब अवतरित होता हूँ —
भगवान कहते हैं "मैं अजन्मा और अविनाशी हूँ मतलब  मेरा न तो जन्म होता है और न ही कभी अंत होता है । जब वे प्रकट होते हैं, हमें लगता है कि वे जन्म ले रहे हैं।
जैसे हमें लगता है कि सूरज उगता है और डूबता है, पर असल में तो धरती घूम रही होती है।
वैसे ही, भगवान का प्रकट होना और अंतर्धान होना एक दिव्य लीला होती है — हमारे जैसे उनकी जन्म मृत्यु नहीं होती ।

राहुल:ओह! मतलब भगवान अपने दिव्य रूप में आते हैं, लेकिन दिखते हमारे जैसे हैं?

दादाजी: सही समझे बेटा।
इसका अगला श्लोक भी बहुत प्रसिद्ध है, सुनो — गीता 4.8

"परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥"

राहुल: इसका क्या मतलब है दादाजी?

दादाजी: इसका अर्थ है —"मैं साधुजनों का उद्धार करने, पापियों का विनाश करने, और धर्म की स्थापना के लिए हर युग में प्रकट होता हूँ।"

राहुल (गहराई से सोचते हुए): तो दादाजी… हर अवतार का एक उद्देश्य होता है? सिर्फ राक्षसों से लड़ने के लिए नहीं, बल्कि कुछ सिखाने के लिए भी?

दादाजी: हाँ बेटा! हर अवतार हमें कुछ न कुछ सिखाता है —
भगवान राम रूप में  सिखाते हैं मर्यादा, कृष्ण रूप में ही सिखाते हैं कर्म, बुद्ध रूप में सिखाते हैं करुणा, नृसिंहरूप में  दिखाते हैं भक्त की रक्षा

राहुल (किताब को खोलते हुए): दादाजी,  ऐसे नहीं मैं हर अवतार की कहानी समझना चाहता हूँ।

राहुल पहला है 1️ मत्स्य अवतारमछली का रूप

राहुल कहानी पढ़ता है।

बहुत पहले एक महाप्रलय आने वाला था। सब कुछ जल में डूबने वाला था, तब भगवान ने मत्स्य (मछली) के रूप में राजा सत्यव्रत से कहा कि वे एक विशाल नाव बनाएं, जिसमें वेद, ऋषि, और सत्कर्म करने वाले लोग हों — ताकि ज्ञान, संस्कृति और अच्छे लोग बचाए जा सके।

राहुल: तो भगवान ने मछली बनकर सबको बचाया। पर दादाजी भगवान ने इस अवतार में हमें क्या शिक्षा दी?
दादाजी: भगवान ने इस अवतार में शिक्षा दी जब सब कुछ डूब रहा हो, तब  ज्ञान संस्कृति और धर्म को बचाना सबसे जरूरी होता  है।

और समय रहते हमें भगवान की चेतावनी समझनी चाहिए ।और भगवान भी मदद करने किसी भी रूप में आ सकते हैं ।

राहुल:  दादाजी दूसरा अवतार पढ़ूँ

2️ कूर्म अवतारकछुए का रूप

राहुल कहानी पढ़ता है

एक बार देवताओं और दानवों ने अमृत निकालने के लिए समुद्र मंथन किया। पर जब मंथन शुरू हुआ, तो भारी मंदराचल पर्वत डूबने लगा। तब भगवान ने कछुए का रूप लिया और मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। कछुए की मजबूत और स्थिर पीठ पर पर्वत टिक गया — और समुद्र मंथन संभव हो गया।

राहुल: क्या भगवान के कछुआ बने बिना समुंद्र मंथन नहीं हो पाता?

दादाजी: बेटा मंदराचल पर्वत डूबने लगा था ना, कोई उसे डूबने से नहीं रोक सकता था इसलिये भगवान को कछुआ बनना पड़ा । भगवान ने कछुए का रूप रख कर बताया कि धैर्य और स्थिरता सबसे बड़ी ताक़त होती है।

 और भगवान ने बताया कि समुद्र मंथन में जैसे देवता और दानव दोनों ने मिलकर काम किया,वैसे ही  जब हम किसी बड़े उद्देश्य के लिए काम करें, तो हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिलजुलकर काम करना चाहिए।

राहुल: और दादाजी ये भी ना कभी भी खुद को छोटा न समझो।  भगवान ने एक साधारण सा (कछुआ) बनकर, कितना  बडा असाधारण कार्य किया।

दादाजी:  सही कहा,

राहुल: (राहुल किताब का पेज पलटता है चित्र देखकर) ओह अब आया वराह अवतर मतलब सूअर.....

(आश्चर्य से) क्या भगवान ने सूअर का रूप भी रखा ?

राहुल:  हाँ बेटा भगवान को अपने बनाए सब जीव प्रिय हैं ।

राहुल कहानी पढ़ता है

 3️ वराह अवतारसूअर का रूप

एक बार राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को अपने बल से खींचकर समुद्र के भीतर जल में डूबो दिया ।

तब भगवान विष्णु ने एक विशाल जंगली सूअर (वराह) का रूप लिया।
और समुद्र में कूदकर, गहराई में जाकर उन्होंने पृथ्वी को अपने दाँतों पर उठाया, राक्षस हिरण्याक्ष से युद्ध किया, और पृथ्वी की रक्षा की।

राहुल: दादाजी! भगवान ने धरती बचाने के लिए  कितनी मेहनत की!
 दादाजी: हाँ, बेटा।  हमें भी अपना धरती को बचाने की कोशिश करनी चाहिए …जब हम कचरा नहीं फैलाते, पेड़ लगाते हैं, जल बचाते हैं — तब हम भी  छोटे-छोटे वराह अवतार बन जाते हैं।

राहुल : और दादाजी वराह यानी सूअर — जिसे समाज में बहुत  अशुद्ध प्राणी माना जाता है — पर भगवान ने उस रूप को धारण कर धरती को बचाया। तो हमें सब जीवों से प्रेम करना चाहिए।

दादाजी: हाँ, बेटा। 

अब राहुल उत्सुक है कि अगला अवतार कौन सा है? वो जल्दी से अपनी किताब पलटता है और देखता है — उसकी आँखें चमक उठती हैं
4️
नृसिंह अवतारआधा नर, आधा सिंह

राहुल कहानी पढ़ता है

प्रह्लाद नाम का भक्त राक्षसों के राजा हिरण्यकश्यप का बेटा था। हिरण्यकशिपु बहुत ही शक्तिशाली और घमंडी राजा था। हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को बहुत बार मारने की कोशिश की, पर प्रह्लाद हर बार बच गया। आख़िर में, हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा, "तेरा भगवान कहाँ है?"
प्रह्लाद बोला "हर जगह है,

 हिरण्यकशिपु ने पूछा , इस खंभे में भी?" प्रह्लाद के हाँ कहते ही

हिरण्यकशिपु ने ही खंभे पर तेजी से वार किया, खंभे से प्रकट हुए भगवान नृसिंह रूप में! आधा सिंह, आधा मानव।
उन्होंने वरदान की हर शर्त को मानते हुए राक्षस को शाम के समय, महल की चौखट पर, अपने नाखूनों से मार डाला ।

राहुल: दादाजी भगवान जी इस रूप में तो बहुत गुस्से में लग रहे है। क्या भगवान को गुस्सा भी आता है?
दादाजी: बेटा भगवान को गुस्सा तभी आता है जब कोई भक्त को सताता है, तब भगवान. सच्चे भक्त की रक्षा करते हैं और  न्याय करते हैं।

राहुल:  (पूछता है) दादाजी प्रह्लाद ने कहा — “वो खंभे में भी हैं।”मतलब ईश्वर हर जगह हैं।
दादाजी: जब हमें भगवान पर सच्चा विश्वास होता है, तो हम ईश्वर को हर जगह अनुभव कर सकते हैं।

राहुल (जोश में): तो अगर हम अकेले पड़ जाएँ, तो भी डरना नहीं चाहिए! क्योंकि भगवान को बुलाओ —वो कहीं से भी आ सकते हैं!

दादाजी (मुस्कराते हुए): हाँ  राहुल!—भगवान के अवतार सिर्फ कहानियाँ नहीं, बल्कि हर समय के लिए प्रेरणा हैं।

राहुल अगले पन्ने पर देखता है —वामन अवतार. ये तो छाता लेकर छोटा सा आदमी लग रहा है

5️ वामन अवतारछोटा ब्राह्मण बालक

राहुल कहानी पढ़ता है

राजा बलि एक बहुत ही पराक्रमी और दानी राक्षस था। पर उसमें अहंकार भी था। उसने स्वर्ग लोक तक जीत कर  देवताओं को पराजित कर दिया था। भगवान छोटे वामन रूप में आए और तीन पग जमीन माँगी।
पहले पग में धरती, दूसरे में आकाश, और तीसरे पग के लिए कुछ बचा ही नहीं तब बलि ने अपने सिर को आगे किया — आप तीसरा पग यहाँ रखें।”

भगवान ने प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और कहा:
तेरा त्याग तेरे अहंकार से बड़ा है । तू मेरा प्रिय भक्त बन गया।”

राहुल (हँसते हुए): देवताओं का दुश्मन और अहंकारी राक्षस भी भगवान का भक्त बन गया।
दादाजी: हाँ बेटा, कभी-कभी त्याग ही सबसे बड़ी जीत होती है। सच्चा बल त्याग में है,बेटा  अधिकार में नहीं जो झुकता है, वही ऊँचा होता है बलि ने अहंकार छोड़कर भगवान को पा लिया।

अब राहुल उत्साह से पेज पलट कर कहता है — अब हम आते हैं भगवान विष्णु के छठे अवतार की ओर —
6️
परशुराम अवतार – ऋषि और योद्धा:

राहुल कहानी पढ़ता है

जब क्षत्रिय राजाओं ने अपना अहंकार और अन्याय बहुत बढ़ा दिया, तब भगवान ने परशुराम रूप में ब्राहमण के घर जन्म लिया (परशु = कुल्हाड़ी + राम = विष्णु का रूप)। — उन्होंने अधर्मी राजाओं को 21 बार पराजित किया, और धर्म की स्थापना की। इसके बाद तपस्या और शांति के मार्ग पर चले गए ।

दादाजी मुस्कराते हैं —परशुराम अवतार —में  भगवान शिक्षा देते हैं कि धर्म कर्म से तय होता है, जाति से नहीं। और धर्म केवल पूजा नहीं, अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना भी है।

राहुल (सोचते हुए):मतलब…जब कोई दूसरों को सताए, तब शांत रहना गलत होता है?

दादाजी (सिर हिलाते हुए): बिलकुल!धैर्य और सहनशीलता अच्छी बातें हैं,
लेकिन अन्याय के खिलाफ चुप रहना — वो अधर्म है।

राहुल (उत्सुकता से): अब कौन सा अवतार दादाजी? क्या अब रामायण वाले राम आएंगे?”

दादाजी हँसते हुए बोले —"हाँ बेटा, अब बारी है भगवान श्रीराम की — मर्यादा पुरुषोत्तम की!"

7️ राम अवतारमर्यादा पुरुषोत्तम दादाजी

राहुल: श्रीराम की कहानी तो मैं जानता हूँ, भगवान राम ने रावण का वध किया, सीता माता, लक्ष्मण, हनुमान सब जानता हूँ मैं!
दादाजी: और राम अवतार ने हमें यह सिखाया कि सच्चा राजा, अच्छा बेटा, एक पति और भाई कैसा होता है। वनवास में, सीता वियोग में , युद्ध  में— हर पल में राम शांत और धैर्यवान रहे। : सच्चा नायक वही होता है जो भावनाओं को नियंत्रण में रखकर सही निर्णय ले।

राहुल (आँखों में श्रद्धा से): हमें राम जी जैसा मर्यादावान  बनना चाहिये न दादाजी, तभी हम महान बन सकते  हैं।

दादाजी (स्नेह से): सही कहा बेटा!भगवान सिखाते हैं कि हमें अपने कर्तव्य को खुशी से निभाना चाहिए।


राहुल मुस्कराता है और जल्दी से अगला पन्ना पलटता है…"अब तो कृष्ण आएँगे ना दादाजी?"

8️ कृष्ण अवतार

दादाजी मुस्कराते हुए बोले —"हाँ बेटा, अब आएगा आठवाँ अवतार — श्रीकृष्ण — लीलाओं से भरा हुआ भगवान कृष्ण का जीवन मस्ती से शुरू होता है — माखन चोरी, रासलीला — लेकिन अंत में वही अर्जुन को गीता का ज्ञान देते हैं।
राहुल: भगवान कृष्ण  का अवतार तो सबसे कूल लगता हैं!मस्त
दादाजी: हाँ, कूल बनकर भगवान नें हमे कर्म और धर्म का मार्ग दिखाया।

भगवान ने शिक्षा दी कि जीवन में भावनाओं और समझदारी दोनों की ज़रूरत होती है। उनकी गीता की बातें आज भी हमें सही और गलत में फर्क करना सिखाती हैं।

राहुल: और दादाजी  भगवान कभी मित्र, कभी सारथी, कभी भाई , कभी प्रेमी ,कभी गुरु बनकर हर रूप में हमारे साथ होते हैं

दादाजी (मुस्कराकर): हाँ बेटा, श्रीकृष्ण सिर्फ भगवान नहीं —वे हमारे जीवन के साथी और मार्गदर्शक और आत्मा की आवाज़ भी हैं।

राहुल आठ अवतार हो गए अब दो बचे हैं

दादाजी : अब बचे हैं — बुद्ध अवतार और कल्कि अवतार!

9️ बुद्ध अवतारकरुणा का रूप

भगवान ने सिद्धार्थ के रूप में जन्म लिया, सुख-सुविधाओं में पला जीवन छोड़ दिया, और वे सब त्याग कर ज्ञान की खोज में निकल पड़े। ध्यान लगाया और  बुद्ध बने।

दादाजी : भगवान बुद्ध ने लोगों को सिखाया — अहिंसा परमो धर्मः हर जीव से प्रेम करो अहिंसा अपनाओकिसी को विचार से भी चोट नहीं पहुँचाना ही अहिंसा है,

करुणा और ज्ञान से आत्मा शुद्ध होती है,ना की दिखावटी पूजा और बलि से ।

राहुल मुस्कराते हुए किताब का आखिरी पन्ना पलटता है…

अब हम पहुँचते हैं अंतिम दशावतार पर —

"दादाजी! यहाँ तो लिखा है — अभी ये अवतार आना बाकी है?" ये अभी आया नहीं है?
दादाजी गंभीर होकर कहते हैं —"हाँ बेटा, ये  भविष्य में मतलब फ्यूचर में होने वाला  अवतार है — कल्कि अवतार!"

राहुल (आश्चर्य से किताब के चित्र को देखता है): दादाजी, इस चित्र में तो भगवान तलवार लेकर घोड़े पर सवार हैं... … ये है कल्कि अवतार?”

दादाजी : हाँ बेटा, ये अभी आए नहीं हैं, लेकिन धरती पर जब झूठ, धोखा, और लालच बहुत बढ़  जाएगा।  धर्म  पूजापाठ का मज़ाक उड़ाया जाएगा और सत्कर्म करने वालों को कमजोर समझा जाएगा। तब यही कल्कि अवतार में एक दिव्य योद्धा प्रकट होंगे।”

राहुल: इस अवतार से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

दादाजी :  ईश्वर सब देखते रहते हैं, अगर अत्याचार बढ़ता है, तो भगवान चुप नहीं रहेंगे —वे सही समय पर धर्म के लिए अवतरित होंगे।

हर युग में बदलाव आता है अंधकार के बाद उजाला आता है कलियुग में भी कल्कि अवतार के बाद एक नया सवेरा आएगा।

दादाजी और राहुल अब पूरी किताब को देखते हैं —
मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और  कल्कि…

दादाजी कहते हैं: इन दसों अवतारों में भगवान ने हमें सिखाया —हर युग, हर परिस्थिति में धर्म, करुणा, सत्य, और कर्तव्य का साथ मत छोड़ो।भगवान किसी न किसी रूप में तुम्हारे  साथ  रहते हैं।राहुल किताब बंद करता है, दादाजी की ओर देखता है, और कहता है:

तो दादाजी भगवान हर रूप में आ सकते हैं… और मेरे अंदर भी रहते हैं।”

दादाजी मुस्कराकर उसे गले लगा लेते हैं।

शालिनी गर्ग

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