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दुर्गा नवरात्री के पर्व पर

  दुर्गा माँ के नवराते , नौ देवी दर्श कराते, व्रत हवन पाठ से, मैया तुम्हे  बुलाते। पहली माँ शैलपुत्री, दूजी ब्रह्मचारिणी, तीजी माता चन्द्रघंटा,के गुण हम ध्याते। कुष्मांडा है चौथी देवी, पाँचवी है स्कंधमाता, छठी दुर्गे कात्यानी का, दरबार सजाते। आँठवी है कालरात्रि, नवी दुर्गे महागौरी, पूज नव दुर्गे रूप, सौभाग्य हम पाते। शालिनी गर्ग  

पितृ श्राद्धपक्ष पर कविता

  पितरों का पर्व आता, ढ़ेर सारी यादें लाता, परंपराये संस्कार, हमें भी निभाने है। प्रेम से भोज बनायें, ब्राह्मन घर बुलाये, दान दक्षिणा देकर, आशीर्वाद पाने है, कुल की सुख समृद्धि, पितरो ने सदा चाहीं, हमें सपने उनके, सच कर जाने हैं। आपसी द्वेष भुलायें, कुटुंब प्रेम बढ़ाये, श्रद्धा सम्मान देकर, पर्व ये मनाने हैं। शालिनी गर्ग

अवधूत गीता दत्तात्रेय के 24गुरु श्रीमद भागवतम से

  चौबीस गुरू बता दिये , दत्तात्रेय भगवान। देखो कौन कौन दिये , ज्ञानवान को ज्ञान।।   1.पहली गुरु पृथ्वी कहें , सहन करे आघात। मात बनकर क्षमा करे , पोषण दे दिन रात।। 1 ।।   2.दूजा गुरु बहता पवन , रहता सदा स्वछंद।   दोष रहित पावन सतत , कर ले कोई संग।। 2 ।।    3.तीजा गुरु आकाश है , सीमा अपरम्पार   सजे ब्रह्मांड गोद में , करता न अहंकार।। 3 ।।   4. चौथा गुरु शीतल सरल , जल है जिसका नाम।   भेदभाव जाने नहीं , जीवन देना काम ।। 4 ।।   5. अग्नि सिखाती है हमें , चमको जैसे धूप।    जिसे मिलों ऐसे मिलो , दे दो अपना रूप ।। 5 ।।   6. बढता घटता चाँद गुरु , होता नहीं निराश।   धरती को दे चाँदनी , मांग रवि से प्रकाश ।। 6 ।।   7.  सूरज गुरु चमके सदा , करे नहीं विश्राम।    धूप , ताप , वर्षा सभी , देना उसका काम ।। 7 ।।   8. बता कबूतर गुरु दिये , मत करना तुम लोभ।   विवेक हर लेगा तभी , दे जायेगा शोक ।। 8 ।।...