Skip to main content

राम विवाह सवैया छंद




 राम विवाह  (सवैया छंद 211 ×7 + 2 भगण)


तोड दिए धनु राम जभी, मिथिला नगरी जय गान लगी,

देख सिया छवि राम मनोहर नैन झुका शरमान लगी।

हाथ लिये जयमाल चली, धडके मन तो घबरान लगी,

धीर धरे हलके हलके, रघुवीर दिखे मुसकान लगी ।।1।।

प्रीत जगे वरमाल उठे, पर लाज जगी सकुचान लगी,  

पास खड़ी सखियाँ चहकी, सिय मंगल बेल अब जान लगी।

हास करें परिहास करें, सखि चंचल यूँ उकसान लगी,

हार दियौ लज श्री सिय ने, हरि को अब हार पहनान लगी।।2।।

राम सिया मनमोहन मूरत, देवन को अति भान लगी,

रूपवती सिय वीर रघू पर, फूलन की बरसान  लगी।

सोच रही पद पंकज छू ,अहिल्या गति याद आन लगी,

तोड दिये प्रभु नैनन से भय, प्रेम पिया सिय पान लगी।।3।।

शालिनी गर्ग 

Comments