राम जन्म चैत्र मास आया , शीत मिटाया , मंगल बेला लाया॥ दिनकर है दमका , अवध है चहका , नौमी शुभ दिन आया , चंद्र - सा चेहरा , मेघ - सा गहरा , नयन सरोज विशाला॥ मोहक मुस्काएँ , चतुर भुजाएँ , तेज पुंज उजियाला , अद्भुत छवि न्यारी , शोभा प्यारी , प्रकटे आज कृपाला। जन - मन हरषाए , मंगल गाएँ , देख कौशल्या लाला॥ दशरथ सुख पाए , भाग्य जगाए , ब्रह्मरूप ये आला। वसुधा बलिहारी , पालनहारी , जन्मा जग रखवाला॥ देवों की टोली , खेले होली , स्वर्ग धरा पर छाया। मुनिवर जय गाएँ , गौ रंभाएँ , खग - मृग सब हर्षाया॥ मणि - हीरा - सोना , मोती - गहना , राजा खूब लुटाया। हरि लीला - धारी , आज धरा पर , राम - रूप में आया॥ शालिनी गर्ग
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