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Showing posts from 2026

राम जन्म

राम जन्म चैत्र मास आया ,   शीत मिटाया ,   मंगल बेला लाया॥ दिनकर है दमका ,   अवध है चहका ,   नौमी शुभ दिन आया , चंद्र - सा चेहरा ,   मेघ - सा गहरा ,   नयन सरोज विशाला॥ मोहक मुस्काएँ , चतुर भुजाएँ ,   तेज पुंज उजियाला , अद्भुत छवि न्यारी ,   शोभा प्यारी ,   प्रकटे आज कृपाला। जन - मन हरषाए ,   मंगल गाएँ , देख कौशल्या लाला॥ दशरथ सुख पाए ,   भाग्य जगाए ,   ब्रह्मरूप ये आला। वसुधा बलिहारी ,   पालनहारी ,   जन्मा जग रखवाला॥ देवों की टोली ,   खेले होली ,   स्वर्ग धरा पर छाया। मुनिवर जय गाएँ ,   गौ रंभाएँ ,   खग - मृग सब हर्षाया॥ मणि - हीरा - सोना ,   मोती - गहना ,   राजा खूब लुटाया। हरि लीला - धारी ,   आज धरा पर ,   राम - रूप में आया॥  शालिनी गर्ग

राम विवाह सवैया छंद

  राम विवाह   (सवैया छंद 211  × 7 + 2 भगण) तोड दिए धनु राम जभी, मिथिला नगरी जय गान लगी, देख सिया छवि राम मनोहर नैन झुका शरमान लगी। हाथ लिये जयमाल चली, धडके मन तो घबरान लगी, धीर धरे हलके हलके, रघुवीर दिखे मुसकान लगी ।।1।। प्रीत जगे वरमाल उठे, पर लाज जगी सकुचान लगी,   पास खड़ी सखियाँ चहकी, सिय मंगल बेल अब जान लगी। हास करें परिहास करें, सखि चंचल यूँ उकसान लगी, हार दियौ लज श्री सिय ने, हरि को अब हार पहनान लगी।।2।। राम सिया मनमोहन मूरत, देवन को अति भान लगी, रूपवती सिय वीर रघू पर, फूलन की बरसान  लगी। सोच रही पद पंकज छू ,अहिल्या गति याद आन लगी, तोड दिये प्रभु नैनन से भय, प्रेम पिया सिय पान लगी।।3।। शालिनी गर्ग